
वर्षा का पहला कॉल..
लेकिन एक दिन अचानक से शाम में उनका कॉल आया।
जब कॉल आया तो उस समय मैं देखा नहीं। बाद में देखा।
तो मैं खुशी से पागल हो गया कि उनका कॉल आया। क्योंकि अब ये कन्फर्म था कि ये नंबर उनका ही है। दिल खुशी से झूम उठा था।
उस दिन हमको राकेश की बहन की शादी में जाना था।
मैं कॉल देखा लेकिन रिसीव नहीं किया क्योंकि हमको बहुत देर बात करनी थी और अभी हमको राकेश के यहां जाना था। खुश तो बहुत था मैं। राकेश के यहां गया उसके थोड़ी देर के बाद ही दादा जी का कॉल आया कि उनका तबियत खराब है तो मैं हड़बड़ाहट में जल्दी घर आ गया और दादा जी को कुछ दवाई दिया और उसके बाद दादा जी हमको बोले की अब तुम भी सो जाओ। घर में केवल मैं और दादा जी ही थे। वो भी दादा जी गाछी वाले घर में। तो घर में केवल मैं ही अकेला था।
सब कुछ देख लिया उसके बाद शांत होकर मैं वर्षा को कॉल किया.. उसने कॉल उठाया और उठाते ही बोली.. तुम बोलते हो कि कॉल नहीं करती हो और जब मैं कॉल करती हूं तो तुम मेरा कॉल नहीं उठाते हो?? तो मैंने उसको जवाब दिया कि तुम्हारा कॉल देखा था लेकिन फ्रेंड के यहां जाना था तो कॉल रिसीव नहीं किया क्योंकि तुमसे आराम से बात करना था।
पहली बार मैं बहुत खुश था उनको लेकर.. बहुत सारी बातें हुई, क्या सब हो रहा है, क्या कर रही हो?? उसने मेरे बारे में पूछा और भी बहुत कुछ..
पढ़ाई लिखाई की बात हुई, जॉब की बात हुई, कहां रहती हो इसकी बात हुई और भी बहुत कुछ।
उस दिन करीब आधे घंटे से ज्यादा बातें हुई। बात करने के लिए मेरे पास कुछ था ही नहीं या यूं कहूं कि हमको कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। बार बार मैं ब्लैंक हो जा रहा था कि क्या कहूं, क्या बोलूं और क्या पूछूं।
जब कॉल रखने की बारी आई तो मैने कहा कि तुम कॉल करती रहना तो उसने फिर बोला कि तुम यही बोलते हो लेकिन कॉल करने पर तुम उठाते ही नहीं हो। इसपर मैने कहा कि ठीक है मैं ही कॉल करूंगा। और मैं यही चाहता भी था कि इनसे बातें बढ़ती जाए और हम एक हो जाए..!!